((exclusive)) | Krittivasi Ramayan In Hindi

अकाल बोधन (दुर्गा पूजा की उत्पत्ति)

संस्कृत से अनभिज्ञ आम जनता तक राम के आदर्शों को सरल भाषा में पहुँचाना।

कृतिवास ओझा का जन्म बंगाल के नाडिया जिले के फुलिया गाँव में हुआ था। वे शैव परिवार से थे, लेकिन उनका हृदय रामभक्ति में डूबा था। कहा जाता है कि उन्होंने यह ग्रंथ बंगाल के महाराजा सुल्तान रूकनुद्दीन बारबक शाह (जो एक मुस्लिम शासक थे) के संरक्षण में लिखा। krittivasi ramayan in hindi

कृत्तिवास ओझा (15वीं शताब्दी) [10, 24] मूल नाम श्रीराम पांचाली [10, 25] मुख्य योगदान

और कृत्तिवास ओझा के बीच एक गहरा आध्यात्मिक सेतु है। दोनों ने ही संस्कृत के कठिन पांडित्य से रामकथा को निकालकर आम जनमानस की भाषा (अवधी और बंगाली) में प्रस्तुत किया [2, 11]। तुलसीदास की रामचरितमानस krittivasi ramayan in hindi

कृतिवासी रामायण में सीता का पुनः वनवास (उत्तरकांड) वाल्मीकि से भी अधिक पीड़ादायक है। राम एक धोबी के कटु वचन सुनकर सात माह की गर्भवती सीता को वन में छोड़ देते हैं। यहाँ कृतिवास ने सीता के चरित्र को लगभग जैसा सशक्त बना दिया है। वह राम से कहती हैं:

हिंदी पाठकों के लिए यह तुलना सबसे महत्वपूर्ण है। जहाँ वाल्मीकि 'आदिकवि' हैं और तुलसी 'भक्तिश्री' के प्रतीक हैं, वहीं कृतिवास 'लोकजीवन के कवि' हैं। krittivasi ramayan in hindi

– हिंदी में कृत्तिवासी रामायण के कई अनुवाद उपलब्ध हैं। अनेक हिंदी लेखकों और कवियों ने इससे प्रेरणा ली है। विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में इसके पद्यों के गायन की परंपरा रही है।

हिंदी पाठकों के लिए कृत्तिवासी रामायण का महत्व तब और बढ़ गया जब जैसे विद्वानों ने इसका हिंदी अनुवाद और लिप्यंतरण किया।

This version popularised the story of Rama performing an "untimely" worship of Goddess Durga to defeat Ravana. Rama offered his own eye when he fell short of the 108 blue lotuses required for the ritual.

यह बात अद्भुत है कि एक शासक जिसका धर्म भिन्न था, उसने संस्कृत-भारतीय संस्कृति के इस महाकाव्य को बढ़ावा दिया। यह भारत की सहिष्णुता और मिश्रित संस्कृति का प्रमाण है। कृतिवास ने अपनी रामायण में कहीं भी कट्टरता नहीं दिखाई, बल्कि मानवीय मूल्यों और करुणा पर बल दिया।