Ziyarat E Nahiya In Hindi
यह ज़ियारत हमारे आख़िरी इमाम, इमाम-ए-ज़माना (इमाम महदी अ.ज.) की तरफ़ से मनसूब (जुड़ी) है। इतिहासकारों के मुताबिक़, यह ज़ियारत उस वक़्त की गवाही है जब इमाम महदी (अ.ज.) ग़ैबत (अदृश्यता) की हालत में थे और
"कैसे तुम्हें फुरात (दजला नदी) से रोका गया, जबकि तुम नूह (अ.स.) की नदियों के भी मालिक थे..." हिंदी: "तुम पर धिक्कार है ऐ यज़ीद की सेना! तुमने उन बच्चों को क्यों मारा जो इमाम हुसैन (अ.स.) की गोद में रो रहे थे?" ziyarat e nahiya in hindi
करबला की त्रासदी (61 हिजरी) के बाद, इमाम हुसैन (अ.स.) का पूरा परिवार, जिसमें उनकी बहन ज़ैनब (स.अ.) और पुत्र अली (जैन-उल-आबिदीन) शामिल थे, शाम के बाजार में कैदी बनाकर ले जाया गया। जब उन्हें वापस मदीना लौटने की अनुमति मिली, तो इमाम जैन-उल-आबिदीन (अ.स.) हर दिन करबला के शहीदों के लिए रोते और विलाप करते थे। इस ज़ियारत के महत्व
आइए, इस ज़ियारत के महत्व, उसके मरतबे और उसकी भावनाओं को समझते हैं। ziyarat e nahiya in hindi